घरेलू वित्घ्तीय सुरक्षा का प्रमुख स्घ्तंभ बनकर उभरी इंश्घ्योरेंस अवेयरनेस कमिटी
देहरादून,। भारत का जीवन बीमा क्षेत्र परिवारों की सुरक्षा और दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नवीनतम आईआरडीएआई वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, जीवन बीमा कंपनियों ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कुल लाभ के रूप में 6.30 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है। यह आंकड़ा उस समर्थन के स्तर का प्रमाण है जो जीवन बीमा उद्योग भारतीय परिवारों को सुरक्षा से लेकर सेवानिवृत्ति और धन सृजन तक जीवन के विभिन्न चरणों में प्रदान करता है।
इंश्घ्योरेंस अवेयरनेस कमिटी (आईएसी-लाइफ) के चेयरपर्सन कमलेश राव ने जीवन बीमाकर्ताओं के व्यावसायिक दर्शन की व्याख्या करते हुए कहा, “भारत की जीवन बीमा कंपनियों का काम करने का तरीकाकृजैसा कि उनकी निरंतरता, भुगतान और वित्तीय मजबूती के आंकड़ों से पता चलता हैकृयह साबित करता है कि जीवन बीमा परिवार के लिए एक ’पैसे के गुल्लक’ की तरह है। यह ज़रूरत पड़ने पर तुरंत पैसा भी देता है और लंबे समय के लिए सुरक्षा भी। सबसे बड़ी बात यह है कि कुल भुगतान का 92 प्रतिशत हिस्सा ’लिविंग बेनिफिट्स’ (यानी पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर मिलने वाला पैसा) के रूप में दिया गया है। इससे पता चलता है कि यह उद्योग सिर्फ मौत के बाद सुरक्षा देने वाला साधन नहीं है, बल्कि एक भरोसेमंद साथी है जो परिवारों की आर्थिक ज़रूरतें पूरी करने में मदद करता है। कुल भुगतान किए गए लाभों में से 2.33 लाख करोड़ रुपये निकासी और सरेंडर के कारण रहे हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.77 प्रतिशत की वृद्धि है। चूंकि निरंतरता अनुपात मजबूत बना हुआ है, इसलिए यह नियोजित जीवनचक्र निकास को दर्शाता है। जीवन बीमा के उत्पाद पोर्टफोलियो के विकास, जिसमें अब बच्चों की योजनाएं, वार्षिकी नीतियां, बाजार से जुड़े लाभ आदि शामिल हैं, का अर्थ है कि उपभोक्ता अपने जीवन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पॉलिसी से प्राप्त राशि को नई पॉलिसी में फिर से निवेश कर सकते हैं।